Music By: सपना जगमोहन
Lyrics By: इन्दीवर
Performed By: मो.रफ़ी, आशा भोसले
मोर भंगिया का मनाई दे, ओ भैरो नाथ
मोर जोगिया का मनाई दे
बात मोरी बिगड़ी बनाई दे
मोर भंगिया का मनाई दे, ओ भैरो नाथ
तेरे द्वार जो भी आए, मन चाहा फल पा जाए
शंकर का प्यारा है तू, दुखियों का सहारा है तू
तेरी कही सुनते हैं बाबा
शिव पे चढ़े तेरा चढ़ावा
भोला से हमको मिलाई दे, ओ भैरो नाथ
मोर भंगिया का मनाई दे, ओ भैरो नाथ
बाघम्बर तन पर सोहे, नाग की माला मन को मोहे
अंग भभूत बैल सवारी, कर त्रिशूल डमरू धारी
चढ़ती है बेल की पाती
भले बुरे सब के साथी
एक बार दरस दिखाई दे, ओ भैरो नाथ
मोर भंगिया का मनाई दे, ओ भैरो नाथ
गंगा जल देवों के देवा, राजी हो करती सेवा
तीजा नयन जब जब खोले, तीनों लोक डगमग डोले
भगतों को तार दिया है
जग के लिए ज़हर पिया है
थोड़ा सा उनको जगाई दे, ओ भैरो नाथ
मोर भंगिया का मनाई दे, ओ भैरो नाथ
जिसने की मन से भक्ति, दे दी उसे अपनी शक्ति
शिव की न जो पूजा करते, कैसे राम पार उतरते
राम की हो या रावण की
पीर हरी सब के मन की
विपदा मोरी मिटाई दे, ओ भैरो नाथ
मोर भंगिया का मनाई दे, ओ भैरो नाथ