Music By: पारंपरिक, श्रेयस पुराणिक, अमित पाध्ये
Lyrics By: अमीर खुसरो
Performed By: राजा हसन
ए सकल बन
सकल बन फूल रही सरसों
सकल बन फूल रही सरसों
सकल बन
अम्बवा फूटे टेसू फूले
गौरी करत शृंगार मालनिया
गढ़वा ले आई करसों
सकल बन...
तरह तरह के फूल मंगाए
ले गढ़वा हाथन में आए
निज़ामुद्दीन के दरवाज़े पर
मेरे निज़ामुद्दीन के दरवाज़े पर
ओह मोहे आवन कह गए
आशिक रंग और बीत गए बरसों
सकल बन...