साँझ ढले गगन तले - Saanjh Dhale Gagan Tale (Suresh Wadkar, Utsav)

Movie/Album: उत्सव (1984)
Music By: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
Lyrics By: वसंत देव
Performed By: सुरेश वाडकर

साँझ ढले गगन तले
हम कितने एकाकी
छोड़ चले नयनों को
किरणों के पाखी
साँझ ढले...

पाती की जाली से, झाँक रही थी कलियाँ
गंध भरी गुनगुन में, मगन हुई थी कलियाँ
इतने में तिमिर धँसा, सपनीले नयनों में
कलियों के आँसू का कोई नहीं साथी
छोड़ चले नयनों को...

जुगनू का पट ओढ़े, आयेगी रात अभी
जुगनू का पट ओढ़े, आयेगी रात अभी
निशिगंधा के सुर में, कह देगी बात सभी
कँपता है मन जैसे डाली अम्बुवा की
छोड़ चले नयनों को...

दूरी - Doori (Rishi Rich, Ranveer Singh, Gully Boy)

Movie/Album: गली बॉय (2019)
Music By: ऋषि रिच
Lyrics By: डिवाइन, जावेद अख्तर
Performed By: ऋषि रिच, रणवीर सिंह

कोई मुझको ये बताये, क्यूँ ये दूरी और मजबूरी
इस दुनिया की क्या स्टोरी, किसके हाथ में इसकी डोरी
राइट में बिल्डिंग आसमानों को छू री
लेफ्ट में बच्ची भूखी सड़कों पे सो री
कैसी ये मजबूरी, पैसा रहना है ज़रूरी
नहीं तो कैसे होगी, पूरी तेरी सीना ज़ोरी
लम्बी गाड़ी जितनी किसकी खोली
आये चावल की खाली बोरी, एक पैसों से भरी पूरी
कैसी ये मजबूरी हाँ (बोल ना)

अब देखो तो हम पास हैं लेकिन
सोचो कितनी दूरी है
अब कैसी ये मजबूरी है
अब सोचो कितनी दूरी है
अब देखो तो हम पास हैं लेकिन
सोचो कितनी दूरी है
कैसी ये मजबूरी है
सोचो कितनी दूरी है

ये तो सारा 200 टक्का टन है
जितना काल तेरा मन, उतना काला तेरा धन
वो तरफ़ा शूट करते बोले गन
ये तरफ़ा करते हैं चिलम
वहाँ पे पेटी-पेटी रम
यहाँ पे खेती-खेती गंध
एक दुनिया में दो दुनिया उजाला एक अँधेरा
एक सेठ जी और एक चेला
कहीं तो मोती मैल में कोई जी रा है अकेला
कहीं तो लोकल डिब्बे में है रेले पे है रेला
उनकी सेवा इनकी मेवा हाँ
अब देखो तो हम पास हैं लेकिन...

घर पे सबके अपने-अपने ग़म हैं
दीवारें ज़्यादा और बोले कमरे यहाँ कम हैं
सोच में ये वज़न है, क्यूँकि खाली सब बर्तन है
मेरा करमा या करम है, अब तो तोड़ना ये भरम है
मुझको सीने से लगा के कुछ नहीं कहती
मेरी माँ बस रोती, मेरी माँ मेरी फौजी
मेरी माँ मेरी बोली, मेरी लोरी मत रोना मत रोना
अब तो होनी है अनहोनी, अब होनी है अनहोनी माँ
अब देखो तो हम पास हैं लेकिन...