कुहू कुहू बोले कोयलिया - Kuhu Kuhu Bole Koyaliya (Lata, Rafi, Suvarna Sundari)

Movie/Album: सुवर्ण सुंदरी (1957)
Music By: आदी नारायण राव
Lyrics By: भरत व्यास
Performed By: लता मंगेशकर, मो.रफ़ी

राग सोहनी
कुहू कुहू बोले कोयलिया
कुंज-कुंज में भंवरे डोले
गुन-गुन बोले
कुहू कुहू बोले...

सज सिंगार ऋतु आई बसंती
जैसे नार कोई हो रस्वंती
सां नी ध म ध नी सां, ग म ग म ध नी सां
रें सां नी ध नी, सां रें सां नी, सां रें सां नी
ध नी नी, ध नी नी, ध नी, म ध ध, म ध ध, म ध
सा रे ग म ध नी सां
सज सिंगार ऋतु आई बसंती
जैसे नार हो रस्वंती
डाली-डाली कलियों को तितलियाँ चूमें
फूल-फूल पंखड़ियाँ खोलें, अमृत घोलें
कुहू कुहू बोले...

राग बहार
काहे घटा में बिजुरी चमके
हो सकता है मेघराज ने
बादरिया का श्याम-श्याम मुख चूम लिया हो
राग सोहनी
चोरी-चोरी मन पंछी उड़े, नैना जुड़े
कुहु-कुहु बोले...

राग जौनपुरी
चंद्रिका देख छाई, पिया चंद्रिका देख छाई
चंदा से मिलके, मन ही मन में मुस्कायी
छायी, चंद्रिका देख छायी
शरद सुहावन, मधु मनभावन
विरही जनों का सुख सरसावन
राग सोहनी
छायी-छायी पूनम की घटा, घूंघट हटा
कुहु-कुहु बोले...

राग यमन
सरस रात मन भाये प्रियतमा, कमल-कमलनी मिले
किरण हार दमके, जल में चाँद चमके
मन सानंद-आनंद डोले रे
ऩी रे ग म ध नी सां, ध नी सां
सां नी सां, गं रें गं सां रें नी सां ध नी म ध नी सां
नी रें नी रें, ध नी ध नी, म ध म ध, ग म ग म
ग म ध नी सां, ग म ध नी सां, ध नी सां

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