जवान हो या बुढ़िया - Jawan Ho Ya Budhiya (Md.Rafi, Bhabhi)

Movie/Album: भाभी (1957)
Music By: चित्रगुप्त श्रीवास्तव
Lyrics By: राजेंद्र कृष्ण
Performed By: मोहम्मद रफ़ी

जवान हो या बुढ़िया, या नन्हीं सी गुड़िया
कुछ भी हो औरत, जहर की है पुड़िया
जवान हो या बुढ़िया...

मारे पिस्तौल से, न काटे तलवार से
मर्द को गुलाम ये बनाये बड़े प्यार से
कभी इकरार से, कभी इनकार से
कजरे की धार से, या बालों के सिंगार
इसीलिये कहता हूँ, डरो-डरो नार से
जवान हो या बुढ़िया...

हो नहीं सकता ये काम भगवान का
नुस्ख़ा जरूर ये तो होगा शैतान का
चार बूँदे नखड़ा, आठ बूँदे झगड़ा
झूठ बारह बूँदे, तो सोलह बूँदे लफड़ा
वाह वाह कैसा, बनाया तुने रगड़ा
जवान हो या बुढ़िया...

चलने में तेज जैसे, सुई घड़ियाल की
लाये ये निकाल के, खबर पाताल की
मीठी है जबान की, झूठी है जहान की
दिल की है खोटी तो, कच्ची भी है कान की
काली हो या गोरी, है बैरी इन्सान की
जवान हो या बुढ़िया...

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