Music By: अरिजीत सिंह
Lyrics By: नीलेश मिश्रा
Performed By: अमृता सिंह, अरिजीत सिंह, राजा कुमारी
मन है कलंदर, मन है जोगी
मन जो चाहे, मन की होगी
फिर क्यों मन ने झूठ को पूजा
दुःख तकलीफें सारी भोगी
कभी सदियाँ, कभी लम्हा
कभी मुश्किल, कभी आसाँ
कभी रूठी, कभी झूठी
कभी पूरी, कभी टूटी
कभी जुगनू, कभी तारा
कभी कम कम, कभी सारा
है बोले ज़िंदगी मीठा
ओह पर इसका स्वाद है खारा
रत्ती रत्ती माशा माशा
तिनका तिनका टूटी आशा
भोले हैं हम, समझ न पाएँ
दुनिया का ये खेल तमाशा
पागल पागल पागल पागल
पागल, फिरे फ़क़ीरा
रेत में देखो ढूंढे हीरा
जोगी कोई मंतर जंतर
फूँके तो कम होवे पीरा
पागल पागल पागल पागल
आँसू चाँदी, दर्द है सोना
धूप का टुकड़ा, याद का कोना
मन कठपुतली, मन है खिलौना
ले फिरता रिश्तों का बिछौना
आँखों में ये झाँक रहा है
मन का गडरियाँ हाँक रहा है
अमृत बेचा करता था ये
ज़हर की पुड़ियाँ फाँख रहा है
फेंक मुखौटा, चेहरा देखा
भेस है बदला धीरा धीरा
टूटे लफ़्ज़ों को जोड़ा है
कविता कर लेगा कबीरा
फिरे फकीरा
पागल फिरे फकीरा...
मैं रंगरेज़, कुम्हार भी मैं हूँ
नफ़रत मैं हूँ, प्यार भी मैं हूँ
मुझमें सारा सत्य बसा है
कण हूँ, मैं संसार भी हूँ
पुनर्जन्म की रस्म करेंगे
रूह अपनी भस्म करेंगे
मरघट में भी फूल खिलेंगे
ऐसा कोई तिलस्म करेंगे
रत्ती रत्ती माशा माशा...
पागल, फिरे फकीरा...
खुद को तोड़ा, खुद को बनाया
खुद को रंगा खुद को सजाया
खुद को सांचा फोड़ दिया है
खुद को फिर से जोड़ लिया है
फेंक मुखौटा...
पागल, फिरे फकीरा...
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