Music By: पराग छाबड़ा
Lyrics By: वायु
Performed By: पराग छाबड़ा, विवेक हरिहरन
भेजे में पहले कोई, डंग डंग वजदी है
हवा में गूंजते हैं रंग कई
चुप से पानी में जो कंकड पड़ गया
छिपी लकीरें चल पड़ी
अरे दिन कहीं डूबा है, हुई कहीं सुबह है
दुनिया चलती है सर्कल पे
सर जो ये उठा है, गरदा ही मचा है
धड़कनों की जैसे हलचल पे
दर्द ही दवा है, अपना ही नशा है
जी ले ज़िन्दगी मर मर के
सबको मैं नचा के, रख दूँगा हिला के
अब ना रहना है डर डर के
घेरे में घेरे में
घेरे में घेरे में
रखली रात अज घेरे में
घेरे में...
घेरे हैं
आसमाँ के तारे सारे झड़ गए
जुगनुओं ने करी रोशनी है
सुस्त थे जो साले दिन वो गुज़र गए
जागी है सनसनी
अरे आग ने छुआ है, उठ रहा धुआँ है
लावा निकला है पत्थर से
रास्ता नया है अब बन गया है
पानियों से कट कर के
सामने जो आए, काम से वो जाए
छोटे चल थोड़ा बच कर के
जिद से हूँ भरा मैं
बिजली सा गिरा मैं
बादलों से ऐसे फट कर के
घेरे में...
सवेरे से ज़्यादा अँधेरे हैं
दिखते हैं चेहरे पे घाव बड़े गहरे
चट्टान टूट जाते हैं
हम तो हीरे हैं, कोयले में पले हैं
फिर भी जी रहे हैं
लड़ेंगे तो शान से, ईमान है अपना
लड़ने से डरते नहीं, काम है अपना
रात तो है घेरे में, अकेले ही झेलेंगे
ज़रूर खेलेंगे टाइम है अपना
अरे दिन कहीं डूबा है...
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