Music By: गौरव दासगुप्ता
Lyrics By: कुँवर जुनेजा
Performed By: अंकित तिवारी
हो मेहरबाँ, देखा है तुझे पहली दफा
हो मेहरबाँ, देखूँ मैं तुझे सौ मरतबा
पलकों में कैद होके
रह जाओ तुम मुझी में
ओ यारम
रब्बा इसे कह दूँ क्या
मेरा हम दम हम दम
इन आँखों में इन बातों में
सुनता हूँ कोई सरगम
रब्बा इसे कह दूँ क्या...
कतरों की प्यास थी
सागर मुझे मिल गया
सूरज की परतें खुली
अँधेरा छन गया
सोंह रब दी तेरा हो गया वे
सोंह रब दी दिल खो गया वे
लम्हों का नहीं संगम
पलकों में कैद हो के...
रब्बा इसे कह दूँ क्या...
हो मेहरबाँ, जीने के लिए काफी है तू
हो मेहरबाँ, थोड़ा सा मैं हूँ बाकी है तू
रहना तो है कहीं पे
रह जाओ तुम मुझी में
ओ यारम
रब्बा इसे कह दूँ क्या...
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