Music By: शाश्वत सचदेव, नुसरत फ़तेह अली खान
Lyrics By: नुसरत फ़तेह अली खान
Performed By: खान साब, शाश्वत सचदेव
गं संन संनसं-संनसं-संनसं-संन...
पन संन-संन-संन संगंसंसं पन-संनसंन-संगंसंनसं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं...
जुर्म सिर्फ़ इतना है, जुर्म सिर्फ़ इतना है
उनको प्यार करते हैं
पन संन-संन-संन...
ऐतबार बढ़ता है, और भी मोहब्बत का
जब वो अजनबी बनकर पास से गुज़रते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं...
वो जो फेर कर नज़रें, पास से गुज़रते हैं
ऐ ग़म-ए-ज़माना हम, तुझको याद करते हैं
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं...
No comments :
Post a Comment
यह वेबसाइट/गाना पसंद है? तो कुछ लिखें...