Music By: अमित त्रिवेदी
Lyrics By: क्षितिज पटवर्धन
Performed By: अभिजीत श्रीवास्तव
आँखों को दूर से ही उसने छुआ है रे
महसूस हमको भी ये जबसे हुआ है रे
कुर्बान उसपे अपना हर पल हुआ है रे
वो ही है वजह वो ही है जगह
वो ही जादू
के मेरे दिल ने कहा मुझसे
फिसल जा तू
के मेरी जाँ ने कहा मुझसे
निकल जा तू
के मेरे दिल...
हो अब क्या सही ना जानूँ
ना गलत जानूँ रे
वो तो बढ़ता ही जाए
हो जैसा चढ़ता हो बुखार
ओ हो अपना पराया अब तो
मैं ना पहचानूँ रे
ये है ऐसी बहार
जो कर दे रे बेड़ा पार
गहराइयों में जैसे जाने लगा है वो
नज़दीकियों में वैसे आने लगा है वो
छूने की देरी है जी
हम भी तैयार हैं
वो बहाना वो ठिकाना
वो ही हरसू
मेरे दिल ने कहा मुझसे
फिसल जा तू...
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