Music By: उस्ताद ग़ुलाम मुस्तफ़ा ख़ान
Lyrics By: मीर तक़ी मीर
Performed By: हरिहरन
हस्ती अपनी हबाब की सी है
ये नुमाइश सराब की सी है
हस्ती अपनी
नाज़ुकी उसके लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
हस्ती अपनी...
बार-बार उसके दर पे जाता हूँ
हालत अब इज़्तराब की सी है
हस्ती अपनी...
'मीर' उन नीम-बाज़ आँखों में
सारी मस्ती शराब की सी है
हस्ती अपनी...
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