Music By: सचिन-जिगर
Lyrics By: आशीष पंडित
Performed By: मामे खान, सचिन-जिगर
कस्तूरी सी सौंधी-सौंधी
एक महक जागी हो
बंजर मन के भीतर भीतर
देख अलख जागी
अब ना कुछ भी और सुहावे
नैणा दीपक राग सुणावे
म्हारा मन होयो नखरालो
ओ यारा म्हारा
मन होयो नखरालो
अब ना कुछ भी...
जिन खोजा तिन पाइयाँ
गहरे पानी पैठ रे
वो छाने मिट्टी नीरी
वो छाने मिट्टी रहा
जो सोच किनारे बैठ
जितना डूबे उतना पावे
नैणा दीपक राग सुणावे
म्हारा मन होयो नखराळो
ओ यारा म्हारा मन होयो मतवालो
अब ना कुछ भी...
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