Music By: संजय लीला भंसाली
Lyrics By: ए.एम.तुराज़
Performed By: श्रेया घोषाल
चौदहवीं शब को कहाँ चाँद कोई ढलता है
हाय पानी में
हाय पानी में कौन जलता है
चौदहवीं शब...
दर्द ऐसा कि हँसी आती है
साँस सीने में फँसी जाती है
जिसमें काँटे बिछे हों मंज़िल तक
ऐसे रस्ते पे कौन चलता है
हाय पानी में...
चौदहवीं शब...
जीता हुआ इश्क़ हार बैठे हैं
इसी तरह दिल को मार बैठे हैं
जैसे हमने मले हैं हाथ अपने
ऐसे हाथों को कौन मलता है
हाय पानी में...
चौदहवीं शब...
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