Music By: तनिष्क बागची
Lyrics By: तनिष्क बागची
Performed By: तनिष्क बागची, ज़हरा एस खान
कोई जुदा न हो किसी से कभी
कोई बाकी न हो बातें अनकही
जिसे चाहे ये दिल, वो रूठे अगर
तू मना ले उसे झूठा सही
झूठा ही सही
मेरे लिए तो आ जाओ ना
जैसे सावन फिर से आते हैं
तुम भी आओ ना
जैसे बादल घिर के आते हैं
तुम भी आओ ना
जैसे सावन...
जा रही मैं तेरी हो के
शिकवे सारे खो के
संग ले चली हूँ बीता लम्हा
आदतें ये थीं जो मेरी
हो गई हैं सारी तेरी
कैसे तू कहेगा खुद को तन्हा
इस बार जब जाओगे तुम
मुझे संग ले जाओ न
जैसी लहरें लौट आती हैं
तुम भी आओ न
जैसी घड़ियाँ रुक जाती हैं
रुक जाओ न
जैसे सावन...
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