Music By: अनुराग सैकिया
Lyrics By: राज शेखर
Performed By: राघव चैतन्य, निकिता गाँधी
ज़रा ज़रा अभी बातें शुरू ही हुई
मगर ख़ुश हूँ मैं आज कल
अभी तलक मेरी शाम तो ऐसी ना थी
जैसी हल्की है आज कल
क्या है ये माजरा
कुछ तो है मिल रहा
या फिर मैं ही बस मन ही मन
किस्से बनाने लगा
ऐसे क्यूँ, हाँ क्यूँ, हाँ क्यूँ
तू कुछ बोले ना
ऐसे क्यूँ...
हो इक दिन हौले से
तुझसे है ये पूछना
रातें तेरी भी थोड़ी
फ़िरोज़ी फ़िरोज़ी सी हैं भी क्या
हो इक दिन रात भर
जो तू देखे जाग कर
कहना सपने सवेरे
गुलाबी गुलाबी से हैं भी क्या
हाँ इक दिन अकेले में दिल से सोचना
इक दिन अकेले में खुद से बोलना
क्या है ये माजरा...
ऐसे क्यूँ....
ऐसे क्यूँ कुछ तो लिखती हूँ
लिख के मिटाती हूँ मैं रात भर
ऐसी क्यूँ बातें खुद की ही
खुद से छिपाती हूँ मैं आज कल
पर ये सब सोचना
दिल को यूँ खोलना
सब कुछ कह कर ही
सबको बताना ज़रूरी है क्या
ऐसे क्यूँ...
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