Music By: संजय लीला भंसाली
Lyrics By: ए.एम.तुराज़
Performed By: श्रेया घोषाल
जब सैय्याँ आये शाम को
तो लग गए चाँद मेरे नाम को
जब सैय्याँ...
सर पे रख के नाच फिरी मैं
हर जलते हुए इल्ज़ाम को
जब सैय्याँ...
दीवारों दर चौखट वौखट
बन गए हैं सब सहेली
ये कुछ पूछे, वो कुछ पूछे
कितने जवाब दूँ मैं अकेली
हज़ारों काम मिल गए हैं
यूँ बैठे बिठाए इस नाकाम को
जब सैय्याँ...
खुद को देखने तक की भी
फुरसत मुझको नहीं मिलती
उनके इश्क के नूर के आगे
शम्मा नहीं जलती
लाखों नाज़ लग गए हैं
फिर गुरूर के इस बदनाम को
जब सैय्याँ...
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