Music By: देवी श्री प्रसाद
Lyrics By: अमिताभ भट्टाचार्य
Performed By: किंग
तू जहाँ से देखता है, मैं गलत हूँ तू सही
देख मेरी नजरों से, गलत में कुछ गलत नहीं
करना है जो करके ही रहूँगा मैंने तय किया
गलत को भी सही तरह से करने का निश्चय किया
लगता है तुझे के जुर्म का हूँ ज़िम्मेदार मैं
जब सबूत ही नहीं तो कैसे गुनहगार मैं
पूरे होश और हवास में किया जो है किया
गलत को भी सही...
तीर की तरह चला के अपने हर उपाय को
मेरे हर कदम के आड़े आने वाले न्याय को
साम दाम दंड भेद से भी मैंने जय किया
गलत को भी सही...
समझना खुद को मुझसे तेज़ तेरी भूल है
सियार जैसी होशियारी ये फ़िज़ूल है
तेरा ख्याल ठेकेदार है तू वक्त का
बदल के रहता है ये वक्त का उसूल है
हरकतों पर कब तलक मेरी नज़र रखेगा तू
करते-करते पहरेदारी एक दिन थकेगा तू
मैं मगर नहीं थकूँगा फैसला ये है किया
गलत को भी सही...
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