शिक़ायत - Shikayat (Archana Gore, Gangubai Kathiawadi)

Movie/Album: गंगूबाई काठियावाड़ी (2022)
Music By: संजय लीला भंसाली
Lyrics By: ए.एम.तुराज़
Performed By: अर्चना गोरे

किसी की याद में शामें गुज़ारने के लिए
कलेजा चाहिए खुद को मारने के लिए
के घाट मौत के हर दिन उतरना पड़ता है
ये इश्क दिल में मेरी जाँ उतारने के लिए

सुना है कि उनको शिक़ायत बहुत है
सुना है कि उनको शिक़ायत बहुत है
तो फिर उनको हमसे मोहब्बत बहुत है
सुना है कि वो तोड़ देते हैं दिल तो
हमें टूटने की भी आदत बहुत है
सुना है कि उनको शिक़ायत बहुत है

नज़र भर के वो देखते भी नहीं हैं
हमारे लिए सोचते भी नहीं हैं
नहीं हैं, नहीं, सोचते भी नहीं हैं
गुज़रते हैं हम रोज़ पहलू से उनके
मगर वो हमें रोकते भी नहीं हैं
हाँ रोकते भी नहीं हैं
हाँ हाँ रोकते भी नहीं हैं
सुना है कि नफ़रत वो करते हैं हमसे
हमें उनकी नफ़रत से राहत बहुत है
सुना है कि उनको...

शहर चाहे जीवन का वीरान कर दो
मगर देख कर हमको हैरान कर दो
भरम आज भी है वफ़ाओं का हमको
इजाज़त है जाना ख़ताओं की तुमको
ख़ता पर भी उनकी ख़फ़ा हम नहीं हैं
किसी हाल में भी जुदा हम नहीं हैं
नहीं है नहीं हाँ जुदा हम नहीं हैं
वो इल्ज़ाम जितने भी चाहे लगा ले
वफ़ादार हैं बेवफ़ा हम नहीं हैं
हाँ हाँ बेवफा हम नहीं हैं
हाँ हाँ बेवफा हम नहीं हैं

सुना है कि वो भूल जाते हैं मिलकर
हमें उनकी यादों की दौलत बहुत है
सुना है कि उनको शिक़ायत बहुत है

सुना है सुना है शिक़ायत बहुत है
हाँ जी हाँ जी सुना है मोहब्बत बहुत है
हाँ हाँ उनकी नफ़रत से राहत बहुत है
हमें टूटने की भी आदत बहुत है
शिक़ायत मोहब्बत हाँ राहत बहुत है
हमें उनकी यादों की दौलत बहुत है
सुना है सुना है हाँ हाँ हमने सुना है
सुना सुना सुना है

सुना है कि उनको शिक़ायत बहुत है

Print Friendly and PDF

No comments :

Post a Comment

यह वेबसाइट/गाना पसंद है? तो कुछ लिखें...