Music By: मेहदी हसन
Lyrics By: अहमद फ़राज़
Performed By: मेहदी हसन
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिले
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिले
ढूंढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती
ये खज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिले
अब के हम बिछड़े...
तू खुदा है, न मेरा इश्क फरिश्तों जैसा
दोनों इन्सां हैं तो क्यों इतने हिजाबों में मिले
अब के हम बिछड़े...
ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नशा बढ़ता है शराबे जो शराबों में मिले
अब के हम बिछड़े...
अब न मैं हूँ, न तू है, न वो माज़ी है फ़राज़
जैसे दो साये तमन्ना के सराबों में मिले
अब के हम बिछड़े...
Lyrics By: अहमद फ़राज़
Performed By: मेहदी हसन
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिले
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिले
ढूंढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती
ये खज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिले
अब के हम बिछड़े...
तू खुदा है, न मेरा इश्क फरिश्तों जैसा
दोनों इन्सां हैं तो क्यों इतने हिजाबों में मिले
अब के हम बिछड़े...
ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नशा बढ़ता है शराबे जो शराबों में मिले
अब के हम बिछड़े...
अब न मैं हूँ, न तू है, न वो माज़ी है फ़राज़
जैसे दो साये तमन्ना के सराबों में मिले
अब के हम बिछड़े...
अब ना वो मैं हूं, न तू है, न वो माजी है फराज
ReplyDeleteजैसे दो साये तमन्नाके सरागोंमें मिले...
This is the correct one!
Deleteअब ना वो मैं हूँ ना तू है ना वो माज़ी है फ़राज़।
ReplyDeleteजैसे दो साहिल तम्मना के सरायों में मिले।
This beautiful Ghazal, set in raag Vasanti/ Vasantika and sung by immortal Mehdi Hassan saab is one of my all time favourites. Aman Hindustani, Bangalore.
ReplyDeleteThis raag is Bhupeshwari or Bhupkali which is very similar to Bhupali but have komal Dhaivat instead of Shuddh Dhaivat which makes entire change and is v effective especially for viyog or judayii
DeleteThis is not Vasanti...it is Bhupkali or Bhupeshwari (commonly called). This raag is v similar to Bhupali (Sa re ga pa dha sa) and only dissimilarity from Bhupali is Komal Dhaivat here which brings entire change to the aura it creates. This has a touch and feel of viyog or judaayii. Mehdi Hasan sahab has made an unforgettable composition.
Deleteअब न वो मैं हूँ, न वो तू है, न वो माज़ी है 'फ़राज़'
ReplyDeleteजैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें
सराबों = मृगतृष्णा
jaise do ssaye
Deletebeautiful gajal by faraaj..
ReplyDeleteजितनी अच्छी Ghazal लिखी गई है उतना ही अच्चा इसे गाने वाला मिला। बस सुनते रहिए।
ReplyDeleteसही बात है मेहंदी हसन साहब किंग्स ऑफ ghazal है
Deletegd
ReplyDeleteIt's heart touching..
ReplyDeleteIt's like a heaven
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