अजीब दास्ताँ है ये - Ajeeb Dastan Hai Ye (Lata Mangeshkar)

Movie/Album : दिल अपना और प्रीत पराई (1960)
Music By : शंकर-जयकिशन
Lyrics By : शैलेन्द्र
Performed By : लता मंगेशकर

अजीब दास्ताँ है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें है कौन सी
न वो समझ सके न हम

ये रौशनी के साथ क्यूँ
धुंआ उठा चिराग से
ये ख्वाब देखती हूँ मैं
के जग पड़ी हूँ ख्वाब से
अजीब..

मुबारके तुम्हें के तुम
किसी के नूर हो गए
किसी के इतने पास हो
के सबसे दूर हो गए
अजीब..

किसी का प्यार ले के तुम
नया जहां बसाओगे
ये शाम जब भी आएगी
तुम हमको याद आओगे
अजीब..

3 comments :

  1. ye khwab dekhti hu main ki JAG padi hu khwab se

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  2. ये शाम जब भी आएगी
    तुम हमको याद आओगे....sunil

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