Music By: देवी श्री प्रसाद
Lyrics By: रक़ीब आलम
Performed By: कनिका कपूर
साड़ी साड़ी पहन के साड़ी
आए तो उसको घूरे
छोटे छोटे स्कर्ट भी जो
पहन के आए तो घूरे
छोड़ साड़ी छोड़ स्कर्ट
इन कपड़ों से क्या होता
नज़रे गन्दी सोच गन्दी
मर्द है बिन पेंदी लोटा
ऊ बोलेगा
या ऊ ऊ बोलेगा साला
गोरे गोरे मुखड़े पे
तैयार कोई मरने को
साँवली को छेड़े
बाहों में आ जाए भरने को
काले गोरे से क्या मतलब
मधु मिले या फिर मठ्ठा
एक ही रट्टा देख दुपट्टा
मर्द है बिन पेंदी लोटा
ऊ बोलेगा
या ऊ ऊ बोलेगा साला
लम्बी लम्बी टांग वाली
छोकरी का दीवाना
छोटी नाटी लड़कियों को
डालता है वो दाना
लम्बी हो या नाटी सबको
बहला के इसने लूटा
चाट लेगा पत्तल जूठा
मर्द है बिन पेंदी लोटा
ऊ बोलेगा
या ऊ ऊ बोलेगा साला
फूले फूले गाल पे
कोई बोले क्या दिखती है
दुबली पतली हो तो फिर
गुलाब की डाली लगती है
मोटी हो या पतली सबके
दरवाज़े पे है अड्डा
देख अकेले डाले फंदा
मर्द है बिन पेंदी लोटा
ऊ बोलेगा
या ऊ ऊ बोलेगा साला
झूठी झूठी शान पे कोई
अपना रौब दिखाता है
कोई बन के दिलवाला तेरे
दिल से खेल के जाता है
एक ही थाली के
ये दोनों है रे चट्टे बट्टे
बत्ती गुल छाया अँधेरा
मर्द है बिन पेंदी लोटा
ऊ बोलेगा
या ऊ ऊ बोलेगा साला...
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