Music By: देवी श्री प्रसाद
Lyrics By: रक़ीब आलम
Performed By: सुनिधि चौहान
तू जानु वानु जो कहता है
बीवी तेरी हूँ लगता है
सामी मोरे सामी
मैं सामी सामी जो कहती हूँ
मरद मेरा तू लगता है
सामी मोरे सामी
तेरे पीछे-पीछे चलूँ जैसे
मंदिर की सीढ़ी पे चढ़ूँ
सामी
तेरे बगल बैठूं ऐसे जैसे
शिव के बगल गौरी
मोर सामी
वो डगर जहाँ तेरी नज़र
ले जाये रे प्रेम नगर
सामी ऐ सामी
अरे सामी आजा सामी
बलम सामी परम सामी
सनम सामी...
घुटनें पे ले के पिया
लुंगी लपेटे पिया
दिल मेरा धक से करे
सामी
मुँह में दबा के बीड़ा
कस कस चबाए जो
केसर तन पे चढ़े
सामी
जब तू चीखे चिल्ला के बोले
झूमें जिगर सामी
पाँव पे पाँव रख के डोले
घूमे नज़र सामी
जो पास आऊँ आँखें चुराए
मन के सबर को छलकाये
सामी ए सामी...
पहनूँ जो नई चुनर
ना पड़े तेरी नज़र
क्या रही इसकी कदर
सामी
बालों में फूल लगे
खुशबू तुझे जो न मिले
टूटे दिल फूलों का ये
सामी
ये पल्लू नीचे जो सरका दूँ
तू न देखे सामी
ये जुल्मी हवा छेड़े मुझे
तू न रोके सामी
गर तेरी जो मैं हो न सकी
फिर ये जनम बेईमानी है
सामी ए सामी
अरे सामी आजा सामी...
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