Music By: देवी श्री प्रसाद
Lyrics By: रक़ीब आलम
Performed By: नकाश अज़ीज़
ये मेरा शहर, ये मेरी डगर
सर पे ये आकाश, मेरा है घर
हाँ मैं ही गलत, हाँ मैं ही सही
मैं ही फैसला हूँ, मैं ही खाता-बही
ऐसा है कौन यहाँ, मुझसे जो जीत सके
है कोई जो तो वो मैं हूँ
मुझसे बड़ा कोई है इस जहां में अगर
वो कोई भी कल का मैं हूँ
हे मूछों पे धार रहे, हाथ में कुल्हाड़ रहे
युद्ध की पुकार रहे, करता न समझौता
ए बिड्डा ये मेरा अड्डा...
मैं नदी में तुझे फेकूँगा
मैं मछली पे लौटूँगा
बरछा फेंक मारूँगा
मैं झंडे सा लहरूँगा
तुझे मिट्टी में बच्चू मिला दूँ अगर
मैं कीमती खनिज बन के
मिट्टी से मिल जाऊँगा
ए बिड्डा ये मेरा अड्डा...
है कौन है तू, कौन है तू
एक फौलाद सा मैं हूँ
तप के तलवार बन जाऊँ
हे कौन है तू, कौन है तू
मिट्टी मिट्टी भी मैं हूँ
मुझे रौंदा तो ईंट बन जाऊँ
है कौन है तू, कौन है तू
एक चट्टान सा मैं हूँ
मुझे तोड़ा तो टूटे हुए
पत्थर से भगवान बन जाऊँ
ए बिड्डा ये मेरा अड्डा...
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