Music By: जी. वी. प्रकाश कुमार
Lyrics By: इरशाद कामिल
Performed By: सैंधवी प्रकाश
चली चली हाँ चली
एक नई हवा हूँ मैं
कभी नहीं देखी जो
वो नई दिशा हूँ मैं
चली चली...
ख्वाब के साथिया
दिल तुझे दे दिया
मैंने जो चाहा वो है किया
चली चली...
मैंने कभी ये जो न कही
बातें वो होठों पे आने लगी
पिछले दिनों से तो मेरी
खामोशियाँ देखो गाने लगी
पाँव से मेरी चलती ज़मीं ये
मैं जो रुकूँ तो रुके
नींदों के बादल है ख्वाब लेकर
पलकों पे मेरी झुके
ख्वाब के साथिया...
चली चली...
मेरी खुशी का आसमाँ
तो आज मेरी ही राहों में है
कैसे कहूँ, किसको कहूँ
क्या ख़्वाब मेरी निगाहों में है
कभी सुनहरा कभी रूपहला
ख़्वाबों को मैंने किया
मैंने हवाओं को पंख देकर
सुबह को मौसम दिया
ख्वाब के साथिया...
चली चली...
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