Music By: जॉली मुखर्जी
Lyrics By: बशीर बद्र
Performed By: हरिहरन, उस्ताद ज़ाकिर हुसैन
अगर यकीं नहीं आता तो आज़माए मुझे
वो आईना है तो फिर आईना दिखाए मुझे
अजब चराग़ हूँ दिन रात जलता रहता हूँ
मैं थक गया हूँ हवा से, कहो बुझाए मुझे
वो आईना है...
बहुत दिनों से इन पत्थरों में पत्थर हूँ
कोई तो आए ज़रा देर को रुलाए मुझे
वो आईना है...
मैं चाहता हूँ कि तुम ही मुझे इजाज़त दो
तुम्हारी तरह से कोई गले लगाए मुझे
वो आईना है...
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