Music By: हरिहरन
Lyrics By: फरहत शहज़ाद
Performed By: हरिहरन
ग़म के घिर आए हैं बादल
ज़रा आहिस्ता चल
बज उठी दर्द की पायल
ज़रा आहिस्ता चल
ग़म के घिर...
रास्ता खो के है पाना यहाँ दुश्वार बहुत
दहर है सोच का जंगल
ज़रा आहिस्ता चल
बज उठी दर्द...
देख मुश्किल है बहुत शहर-ए-वफ़ा की राहें
हर क़दम पर है नया बल
ज़रा आहिस्ता चल
बज उठी दर्द...
आबला-पाई से बन आई है जाँ पर 'शहज़ाद'
ख़ार भी कहते हैं पागल
ज़रा आहिस्ता चल
बज उठी दर्द...
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