Music By: तनिष्क बागची
Lyrics By: अमिताभ भट्टाचार्य
Performed By: विशाल ददलानी, ज़ारा खान
हादसों के इस शहर में
आज कोई आएगा
खोल देगा राज़ या फिर
राज़ खुद बन जाएगा
रात की आगोश में
ये राज़ रहने दीजिए
कीजिएगा कल खुलासा
आज रहने दीजिए
है कोई परवाना यहाँ
जो जान पे अपनी खेलेगा
आशिकी में हो के फ़ना
बाँहों में शमा को ले लेगा
इतनी हसीनों पे
कितनी दफा ये डोला
फिर भी फकीरों का
पहने हुए है चोला
इतर की शीशी है
जहाँ भी खुल जाए
हवा में घुल जाए
दिल जोगीरा हरफनमौला
आए तो कई करने इधर
दिल-ए-बेकरार की दवा
शब से सहर होते ही मगर
बारी-बारी सारे हो गए हवा
शब के अँधेरे में
जन्नत दिखाने वाला
मैं तो सवेरे भी
दिल ना दुखाने वाला
के मेरी बाहों में
रात जो गुजरे वो
उम्र भर जैसी है
दिल जोगीरा हरफनमौला...
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