Music By: अजय-अतुल
Lyrics By: अजय-अतुल
Performed By: अजय गोगावाले
खाने कू पीने कू
साबुन से धोने कू
बिंदास आया ये झुंड है
मस्ती में जीना है
लेना न देना है
फुरसत से आया ये झुंड है
ये कटरेली है, नोटों में काय कू
चिल्लर चबाने का
लीटर में है, ज़िन्दा तू काय कू
क्वार्टर दिखाने का
ऐसे में डर क्यों, लगा है कर्फ्यू
जैसे कि भारत बंद है
किस्मत के मारों का
दस में से चारों का
जलते अंगारों का झुंड है
हमको दुनिया ने रोज़ देखा है
फिर भी अनदेखा झुंड है
हम न ज़िन्दा थे, हम न मरते हैं
लोग कहते हैं झुंड है
क्या फायदा अपुन की
ज़िन्दा लाश पर रोने का
ख़तम हुआ जो भी कमाया
अब क्या खोने का
अपुन की बस्ती गटर में है पर
तुम्हारे दिल में गंद है
गटर की नाली से
पब्लिक की गाली से
रस्ते पे आया ये झुंड है
हे लोगों की फट गेली
बजू में हट केली
आया ये शेरों का झुंड है
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