Music By: सचेत-परम्परा
Lyrics By: इरशाद कामिल
Performed By: सचेत टंडन
अंगारों से जो खेलोगे
वो सब जला देंगे
इंसाफ़ करेगा माफ़ ना
तुम्हें क्या पता हम आग हैं
हमको ना जलना तुम सिखलाओ
हल्ले को दे हल्ला शेरी
हल्ला शेरी, हल्ला शेरी
हल्ला
अकल बिना जो राज करे वो
दो धारी तलवार लगे
उसको लगता झूठा हल्ला
हमको जो अधिकार लगे
हल्ले को दे...
तुम जात पात के खेल में
अपना राज़ बचाने निकले हो
हम आने वाला कल और
अपना आज बचाने निकले हैं
तुम अपनी राह के राही हो
हम अपना रस्ता चलते हैं
अपनी मर्ज़ी के सूरज हैं
जब मन आए तो चढ़ते हैं
जब मन आए तो ढलते हैं
हल्ले को...
जब ज़ुल्म सियासत करती है
तो खून खौलने लगता है
जब लाठी बातें करती है
तो पत्थर बोलने लगता है
इंसाफ़ करेगा माफ़ ना...
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