Music By: सचेत-परम्परा
Lyrics By: इरशाद कामिल
Performed By: परम्परा टंडन
पढ़ाई लिखाई साढ़े बाईस बाईस
पढ़ाई लिखाई साढ़े बाईस बाईस
सारी दुनिया जुआ घर है
हर अपराधी यहाँ निडर है
तू भी फेक ले अपना डाइस
बिन मेहनत के सब कुछ नाइस
पढ़ाई लिखाई...
कानून के ठेकेदार हैं जो
अनपढ़ गँवार हैं वो
चलते उसकी चाल प्यादे
बगल में रखते छुरी ज़बाँ पे
देश प्रेम के कसमें वादे खाते हैं
पढ़ाई लिखाई...
पढ़कर भी जो अनपढ़ हैं
सारे झगड़ों की वो जड़ हैं
मिलजुल के जो भीड़ हुए हैं
धंधे वालों की हैं पोपट
नासमझी में वीर हुए हैं
भीड़ बने तो बनते माइस
पढ़ाई लिखाई...
No comments :
Post a Comment
यह वेबसाइट/गाना पसंद है? तो कुछ लिखें...