Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: जावेद अख़्तर
Performed By: जगजीत सिंह
मुझको यक़ीं है सच कहती थीं
जो भी अम्मी कहती थीं
जब मेरे बचपन के दिन थे
चाँद में परियाँ रहती थीं
एक ये दिन जब अपनों ने भी
हम से नाता तोड़ लिया
एक वो दिन जब पेड़ की शाखें
बोझ हमारा सहती थीं
मुझको यक़ीं है...
एक ये दिन जब सारी सड़कें
रूठी रूठी लगती हैं
एक वो दिन जब आओ खेलें
सारी गलियाँ कहती थीं
मुझको यक़ीं है...
एक ये दिन जब जागी रातें
दीवारों को तकती हैं
एक वो दिन जब शामों की भी
पलकें बोझल रहती थीं
मुझको यक़ीं है...
एक ये दिन जब लाखों ग़म
और काल पड़ा है आँसू का
एक वो दिन जब एक ज़रा सी
बात पे नदियाँ बहती थीं
मुझको यक़ीं है...
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