Music By: सचेत-परम्परा
Lyrics By: शेली
Performed By: जावेद अली, सचेत टंडन
जिंद मेरिये बार बार खिलदा ऐ
ख्वाब एक इस नु मनावा
जिंद मेरिये ओ जिंद मेरिये...
ये जो ख़ला है ज़िद दी खिचदी
राह मैं इस नु दिखावाँ
उड़दी फिरदी तुर्रदी हवा ये
इसमें ही बहता जावाँ
ओ जिंद मेरिए...
रोंदेयाँ वि हस्सेयाँ मैं, किसी नु ना दस्सेयाँ मैं
अंख वाले हंजुआ नु, बारिशाँ ही दस्सेयाँ मैं
कुछ वि मैं भुल्लेया नी, शुक्र है रुलेया नी
हौले से ये राताँ पूछे, जग सोये तू ना सोया
दम नई छुट्टेया वे, कुछ नई टुट्टेया वे
कोरे खाली पन्ने पे, फ़तेह लिखेया
ओ जिंद मेरिए...
चल्लेया न रुकेया मैं, अज्ज वि ना मुक्केया मैं
दिल जीतने है बाकी, लिख के है रखेया मैं
नज़र निशाने पे है, रब की दीवाने पे है
शिकन ना मत्थे उत्ते, मन वि ठिकाने पे है
दम नई छुट्टेया वे, कुछ नई टुट्टेया वे
कल्ला बैठ चन्न नु मैं पावाँ चिट्ठियाँ
ओ जिंद मेरिए...
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