Music By: सचेत-परम्परा
Lyrics By: इरशाद कामिल
Performed By: सचेत टंडन
ख़्वाब ख़्वाब टुकड़ों में, तोड़ना था तो
छोड़ना था तो, दिल लगाया क्यूँ था
ख़्वाब ख़्वाब...
तुझसे रूठा रूठा हूँ
तुझसे भी ना जुड़ पाऊँ
इतना टूटा टूटा हूँ
जो तुमको छीने मुझसे
वो झूठ है दुनियादारी
दिल वालों को ना समझे
मैं राख करूँ ये सारी
जैसे देते हैं ताने
वैसे करती तारीफ़ें
ये दुनिया ग़म से बोझल
बस देती हैं तकलीफें
तुझसे रूठा रूठा हूँ...
नाराज़ हुआ मैं खुद से
या आज खफ़ा हूँ सबसे
एक बार मिला जो मुझको
तो पूछूँगा मैं रब से
क्या शौक चढ़ा था बोलो
क्यूँ तुमने ये इश्क बनाया
ये बाँटे हैं दर्द सभी को
ना रास किसी के आया
ख़्वाब ख़्वाब...
आँख से छलकती है चाहतें तेरी
यूँ मिटाना था तो बनाया क्यूँ था
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