Music By: हरिहरन
Lyrics By: ग़ालिब
Performed By: हरिहरन
दायम पड़ा हुआ तेरे दर पर नहीं हूँ मैं
ख़ाक ऐसी ज़िन्दगी पे कि पत्थर नहीं हूँ मैं
दायम पड़ा हुआ...
या रब ज़माना मुझको मिटाता है किस लिए
लौह-ए-जहां पे हर्फ़-ए-मुकर्रर नहीं हूँ मैं
दायम पड़ा हुआ...
क्यूँ गर्दिश-ए-मदाम से घबरा न जाए दिल
इंसान हूँ पियाला सागर नहीं हूँ मैं
दायम पड़ा हुआ...
हद चाहिए सज़ा में उक़ूबत के वास्ते
आख़िर गुनाहगार हूँ काफ़िर नहीं हूँ मैं
दायम पड़ा हुआ...
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