Movie/Album: नदिया के पार (1982)
Music By: रविन्द्र जैन
Lyrics By: रविन्द्र जैन
Performed By: हेमलता, जसपाल सिंह
कौन दिसा में ले के चला रे बटुहिया
ए ठहर-ठहर, ये सुहानी सी डगर
जरा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नयना बाँधे ये डगरिया
कहीं गए जो ठहर, दिन जाएगा गुजर
गाड़ी हाँकन दे, हाँकन दे
कौन दिसा में...
पहली बार हम निकले हैं घर से
किसी अंजाने के संग हो
अनजाने से पहचान बढ़ेगी तो
महक उठेगा तोरा अंग हो
महक से तू कहीं बहक न जाना
न करना मोहे तंग हो
तंग करने का तोसे नाता है गुजरिया
हे ठहर ठहर...
कितनी दूर अभी कितनी दूर है
ए चंदन तोरा गाँव हो
कितना अपना लगने लगे
जब कोई बुलाये ले के नाम हो
नाम न ले तो क्या कह के बुलायें
कैसे चरायें काम हो
साथी मितवा या अनाड़ी कहो गोरिया
कहीं गये जो ठहर...
ए गुंजा, उस दिन तोरी सखियाँ
करती थीं क्या बात हो
कहतीं थीं तोरे साथ चलन कोसो
आ गए हम तोरे साथ हो
साथ अधूरा तब तक जब तक
पूरे ना हो फ़ेरे सात हो
अबही तो हमरी है बाली रे उमरिया
ठहर ठहर...
Music By: रविन्द्र जैन
Lyrics By: रविन्द्र जैन
Performed By: हेमलता, जसपाल सिंह
कौन दिसा में ले के चला रे बटुहिया
ए ठहर-ठहर, ये सुहानी सी डगर
जरा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नयना बाँधे ये डगरिया
कहीं गए जो ठहर, दिन जाएगा गुजर
गाड़ी हाँकन दे, हाँकन दे
कौन दिसा में...
पहली बार हम निकले हैं घर से
किसी अंजाने के संग हो
अनजाने से पहचान बढ़ेगी तो
महक उठेगा तोरा अंग हो
महक से तू कहीं बहक न जाना
न करना मोहे तंग हो
तंग करने का तोसे नाता है गुजरिया
हे ठहर ठहर...
कितनी दूर अभी कितनी दूर है
ए चंदन तोरा गाँव हो
कितना अपना लगने लगे
जब कोई बुलाये ले के नाम हो
नाम न ले तो क्या कह के बुलायें
कैसे चरायें काम हो
साथी मितवा या अनाड़ी कहो गोरिया
कहीं गये जो ठहर...
ए गुंजा, उस दिन तोरी सखियाँ
करती थीं क्या बात हो
कहतीं थीं तोरे साथ चलन कोसो
आ गए हम तोरे साथ हो
साथ अधूरा तब तक जब तक
पूरे ना हो फ़ेरे सात हो
अबही तो हमरी है बाली रे उमरिया
ठहर ठहर...
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