पत्थर सुलग रहे थे - Patthar Sulag Rahe The (Hariharan, Ghazal Ka Mausam)

Movie/Album: ग़ज़ल का मौसम (1981)
Music By: उस्ताद ग़ुलाम मुस्तफ़ा ख़ान
Lyrics By: मुमताज़ राशिद
Performed By: हरिहरन

पत्थर सुलग रहे थे कोई नक़्श-ए-पा न था
हम जिस तरफ़ चले थे उधर रास्ता न था
पत्थर सुलग रहे थे...

यूँ देखती है गुमशुदा लम्हों के मोड़ से
इस ज़िन्दगी से जैसे कोई वास्ता न था
हम जिस तरफ़...

परछाइयों के शहर की तन्हाइयाँ न पूछ
अपना शरीक़-ए-ग़म कोई अपने सिवा न था
हम जिस तरफ़...

पत्तों के टूटने की सदा घुट के रह गई
जंगल में दूर-दूर हवा का पता न था
हम जिस तरफ़...

No comments :

Post a Comment

यह वेबसाइट/गाना पसंद है? तो कुछ लिखें...