Music By: जॉली मुखर्जी
Lyrics By: मज़हर इमाम
Performed By: हरिहरन
ये तजुर्बा भी करूँ ये भी ग़म उठाऊँ मैं
कि ख़ुद को याद रखूँ उसको भूल जाऊँ मैं
ये तजुर्बा भी करूँ...
फ़रेब-कार में कुछ तो है कोई बात तो है
कि जानबूझ के इतने फ़रेब खाऊँ मैं
कि ख़ुद को...
वो शख़्स है के नसीम-ए-सहर का झोंका है
बिखर ही जाऊँ जो उसको गले लगाऊँ मैं
कि ख़ुद को...
कभी तो हो मेरे एहसास-ए-कमतरी में कमी
कभी तो हो कि उसे खुल के याद आऊँ मैं
कि ख़ुद को...
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