Music By: हरिहरन
Lyrics By: शमीम जयपुरी
Performed By: हरिहरन
दिल तो क्या रूह-ए-फ़न को भी गरमा गई
ज़हन का दर खुला तो ग़ज़ल आ गई
दिल तो क्या...
सुर्ख़ फूलों से महकी हुई फसल-ए-गुल
आग यादों की सीने में दहका गई
ज़हन का दर...
छनछनाती हुई पायलों की सदा
उंघती रह-गुज़ारों को चौंका गई
ज़हन का दर...
इक बचाओ-बचाओ की सहमी सदा
मेरे पैरों में ज़ंजीर पहना गई
ज़हन का दर...
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